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दुनियाभर में व्हाइट​​​​​​​ नॉइज सुनने का ट्रेंड; सुकून देने वाला संगीत तनाव घटाता है, अच्छी नींद लाता है

वॉशिंगटन में रहने वाली माया मोंटोया के लिए सॉन्ग ऑफ द ईयर रहा व्हाइट नॉइज। खासकर डिजिटल म्यूजिक प्लेटफॉर्म स्पॉटिफाई का सेलिस्टियल व्हाइट नॉइज। ये तीन घंटे का एक शांत म्यूजिक है। 27 वर्षीय मोंटोया कहती हैं कि हाल ही में जब स्पॉटिफाई ने अपने साल का रैप्ड चार्ट जारी किया तो वे चौंक गई। सेलिस्टियल व्हाइट नॉइज उनके चार्ट में शीर्ष पर था।

बाद में ऐसे सैकड़ों लोगों ने बताया कि उनके टॉप चार्ट में इस बार व्हाइट नॉइज से जुड़ा म्यूजिक टॉप पर रहा। व्हाइट नॉइज ऐसी शांत ध्वनियां होती हैं जो सोने में मदद करती हैं। स्पॉटिफाई पर इस साल बैकग्राउंड साउंड, शांत म्यूजिक की मांग बढ़ी है। पिछले साल मार्च में जब कोरोना के कारण लोगों की चिंता बढ़ी तो यू-ट्यूब पर नींद से जुड़े साउंड, प्रकृति से जुड़ी ध्वनियां और सोने के समय आदि से जुड़े शब्दों से सबसे अधिक सर्च किए गए।

इनकी संख्या ऑल टाइम हाई रही। वहीं दूसरी तरफ चीन में 20 करोड़ लोग रात में संगीत सुनते हैं। एंडेल एप के डाउनलोड में बीते वर्ष अगस्त तक 80% की बढ़ोतरी हो गई। यह एप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ध्वनि बनाता है। ऐसे ही मशहूर एप काम (Calm) की डाउनलोड संख्या अगस्त में दोगुनी हो गई।

आखिर होती क्या है व्हाइट नॉइज

1. क्या होती है व्हाइट नॉइज?
वाइट नॉइस मन को सुकून देने वाली और शांत करने वाली ध्वनि होती है, जो नींद आने में मदद करती है। यह कोई गाना नहीं होता बल्कि यह प्राकृतिक या बनाई हुई ऐसी ध्वनि होती है जो किसी शोर-शराबे जैसी धुन के ऊपर ओवरलैप करती है और सुकून देती है। विज्ञान में किसी साउंड की फ्रीक्वेंसी और एप्टीट्यूड के संबंध के आधार पर उसे अलग-अलग रंगों में नाम दिया जाता है।
2. क्या यह वैज्ञानिक रूप से साबित है?
ऐसे ही पिंक नॉइज, ब्राउन नॉइज आदि भी होते हैं। कई अध्ययनों में वाइट नॉइज को नींद के लिए बेहतर बताया गया है। 2018 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया कि व्हाइट​​​​​​​ नॉइज फाेकस करने की क्षमता बढ़ाती है, इससे नींद बेहतर आती है। इसी वर्ष दक्षिण कोरिया में एक अध्ययन में कहा गया कि ऐसी ध्वनियों को सुनने से तनाव कम होता है। यह डिमेंशिया से उबरने में भी मददगार है।

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वाइट नॉइस मन को सुकून देने वाली और शांत करने वाली ध्वनि होती है, जो नींद आने में मदद करती है।
अमेजन, एपल और गूगल ने ट्रम्प समर्थकों का पसंदीदा ऐप हटाया; हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप

पिछले कुछ माह में सोशल नेटवर्क पार्लर अमेरिका में तेजी से बढ़ने वाला ऐप रहा है। फेसबुक और ट्विटर ने गलत जानकारी देने और हिंसा भड़काने वाले पोस्ट हटाना शुरू किए तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लाखों समर्थक इस मुफ्त ऐप पर चले गए। लेकिन, शनिवार की रात पार्लर को अचानक अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करने की नौबत आ गई। अमेजन, एपल और गूगल ने ऐप को अपने स्टोर्स से हटा दिया है।

सबसे पहले एपल ने आईफोन और फिर गूगल ने अपने ऐप स्टोर से पार्लर को हटाया। इसके बाद अमेजन ने पार्लर को सूचना दी कि वह उसे अपनी वेब होस्टिंग सर्विस से अलग कर रही है। ऐप पर नियम तोड़ने का आरोप लगाया गया है।

अमेजन के फैसले के कारण पार्लर का समूचा प्लेटफार्म जल्द ही ऑफलाइन हो जाएगा। उसे नई होस्टिंग सेवा की तलाश करनी पड़ेगी। पार्लर के प्रमुख अधिकारी जॉन मेट्ज ने एक मैसेज में कहा कि बड़ी टेक कंपनियां प्रतिस्पर्धा खत्म करना चाहती हैं। एक दिन पहले लग रहा था कि टेक्नोलॉजी कंपनियों के खिलाफ ट्रम्प समर्थकों और कट्टरपंथियों के बढ़ते गुस्से से पार्लर को फायदा होगा। ट्रम्प पर ट्विटर की पाबंदी के बाद वह इन लोगों की स्वाभाविक पसंद हो सकता था।

अमेजन ने पार्लर को एक पत्र में लिखा है कि उसने कंपनी को उसकी साइट पर हिंसा के बढ़ावा देने वाले 98 पोस्ट के उदाहरण भेजे थे। इनमें से कई पोस्ट अब भी मौजूद हैं। लिहाजा साफ है कि पार्लर में अमेजन के नियमों का पालन करने की प्रभावी प्रक्रिया नहीं है। हम ऐसे ग्राहक को अपनी सेवाएं नहीं दे सकते हैं जो दूसरे लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले कंटेंट को नहीं हटा सकता है।

शुक्रवार को एपल ने पार्लर को अपने ऐप से आपत्तिजनक पोस्ट हटाने या ऐप स्टोर से हटाए जाने की चेतावनी दी थी। कुछ पोस्ट हटाए भी गए लेकिन एपल ने शनिवार को बताया कि यह पर्याप्त नहीं है। गूगल ने पार्लर को अपने प्रमुख एंड्रॉयड ऐप स्टोर से अलग कर दिया है लेकिन ऐप को दूसरी जगह से डाउनलोड करने की अनुमति है।

नफरत फैलाने वाले दूसरे ऐप​ भी​​​​​​ प्रभावित होंगे
इंटरनेट पर बहुत बड़ी संख्या में वेबसाइट और ऐप्स अमेजन वेब सर्विस के सहारे चलते हैं। जबकि एपल और गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम दुनिया के लगभग सभी स्मार्ट फोन पर मौजूद हैं। इन कंपनियों द्वारा नियम तोड़ने वाले ऐप्स और साइट के खिलाफ कार्रवाई करने का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। कई कंपनियों ने ट्रम्प के समर्थकों को खुली अभिव्यक्ति के नाम पर सोशल मीडिया नेटवर्क मुहैया कराए हैं। इन पर पाबंदी की चिंता किए बिना धमकियां देने, नफरत और झूठ फैलाने वाला कंटेंट धड़ल्ले से दिया जा रहा है। टेक कंपनियों की कड़ी कार्रवाई से ऐसे ऐप्स को अपने यहां जाने वाले पोस्ट की बारीकी से निगरानी करनी पड़ेगी।

कई साइट्स ने कंटेंट में सुधार किया
अमेजन, एपल और गूगल के निर्णय से दूसरे ऐप अपने कंटेंट में सुधार के लिए कदम उठाएंगे। 6 जनवरी को वाशिंगटन में संसद भवन-केपिटल बिल्डिंग में घुसने वाले दंगाइयों ने एक लाइव स्ट्रीमिंग साइट डी लाइव पर घटना का प्रसारण किया था। साइट ने बताया कि उसने सात चैनल अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिए हैं। भीड़ के 100 पूर्व प्रसारणों को हटा दिया है। ट्रम्प समर्थकों और उग्र दक्षिण पंथियों के पोस्ट देने वाली साइट क्लाउटहब और माई मिलिशिया ने अभी हाल में हिंसा की धमकी देने वाले पोस्ट पर पाबंदी लगाई है।

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फेसबुक और ट्विटर ने गलत जानकारी देने और हिंसा भड़काने वाले पोस्ट हटाने शुरू किए तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लाखों समर्थक मुफ्त ऐप पार्लर पर चले गए थे।
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